28 मार्च 2020

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श्राद्ध पक्ष

श्राद्ध पक्ष

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वैदिक विधान के अनुसार श्राद्ध पूजन करने से जीवन मे सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस लिए श्राद्ध पूजन अवश्य कराना चाहिए।

सामान्य परिचय-श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष यानि हमारे मृत पूर्वजों का तर्पण करवाना हिन्दू धर्म की एक बहुत प्राचीन प्रथा व पर्व है। हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष के सोलह दिन निर्धारित किए गए हैं ताकि आप अपने पूर्वजों को याद करें और उनका श्राद्ध,तर्पण करवा कर उन्हे शांति और मुक्ति प्रदान करे,जिससे आपको उनका आर्शीवाद मिलता रहे।जिन के पितरों की मुक्ति नही होती उन्हें पितृ दोष लगता हैं,और जीवन में उनको अनेको बाधाँ व परेशनियाँ उठानी पड़ती हैं,जैसे संतान बाँधा,विवाह बाँधा,रोग,हानि,व जीवन में सफलता नही मिलती इस लिए इन दोषों से बचने व पितरों की शांति हेतु पितृ पूजन किया जाता हैं।

क्यूँ करे श्राद्ध पक्ष में पितरों का पूजन-पितरों का पूजन,श्राद्ध व तर्पण करने से उनकी जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति होती हैं,साथ ही दुर्घटना,रोग,अकाल मृत्यु के कारण जो पितृ गति नही पाते ओर भटकते हैं,उनकी मुक्ति के लिए पितृ पूजन अति अवश्य होता हैं।इस लिए पितरों का पूजन किया जाता हैं।

पितृ पूजन के प्रकार-वस्तुत पितरों का पूजन सभी श्राद्ध  पक्ष में करते है,या किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु करते है,परन्तु विशेष प्रकार के पूजन व् मन्त्र-जाप-पाठ-हवन हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

श्राद्ध पूजन या पितृ पूजन के लाभ
श्राद्ध पूजन या पितरों के पूजन करने से उनको मुक्ति मिलती हैं।
अकस्मात् या अकाल मृत्यु के दोष से पितरों को भटकना पड़ता है,श्राद्ध पूजन से पितरों को गति मिलती हैं।
पितृ दोष से संतान बाधा,विवाह बाधा,स्वास्थ्य बाधा,पारिवारिक बाधा,आर्थिक बाँधा आती हैं,तथा श्राद्ध पूजन,पितृ पूजन से जीवन मे उत्पन्न बाँधा समाप्त हो जाती है।
पितरों का आशीर्वाद ओर कृपा कुल मे सदैव बनी रहती हैं।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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