03 दिसंबर 2020

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शनि पूजन

शनि पूजन

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वैदिक विधान के अनुसार भगवान शनि की कृपा प्राप्ति हेतु शनि पूजन किया जाता है।सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु शनि पूजन कराना  चाहिए।

सामान्य परिचय -फ़लित ज्योतिष में शनि को मंद,असित,सूर्य पुत्र ओर शनैश्चर कहते है।शनि वायु तत्व और लोह धातु का कारक है।कुंडली में इसके अशुभ होने पर व्यक्ति के जीवन में बहुत कष्ट,परेशानिया,और असाध्य रोग उत्पन्न हो जाते है,इसकी मंद गति के कारण यह अपनी दशा काल में 19 वर्ष तक व्यक्ति को पीड़ित करता है और गोचर गत संचरण में साढ़े साती,व् ढय्या में अधिक अशुभ प्रभाव देता है।
शरीर में वायु विकार ,कम्पन,हड्डी,दाँत के रोग को देने वाला होता है।ज्योतिष शास्त्र में इसे सर्वाधिक पाप ग्रह माना गया है।इसके अशुभ प्रभाव से पिता के साथ सम्बन्ध ख़राब हो जाते है,समाज में प्रतिष्ठा व् छवि पर दाग लग जाते है,व्यपार में नुकसान,नौकरी का छूटना,कोट कच्चैहरी के चक्कर में फसना,रोगो के कारण अस्पताल तक जाना पड़ता है।

क्यों  करे शनि  का पूजन -शनि देव न्याय करने वाले है,यह जिस किसी की कुंडली में अशुभ स्थिति में होते है तो उसे राजा से रंक बना देते है,इनके प्रभाव से देवता तक नहीं बच पाए तो मनुष्य क्या है,परन्तु इनका एक सौम्य रूप भी है जो भी मनुष्य इनकी सरन में जाता है,इनका ध्यान-पूजा-पाठ करता है शनि देव उस पर विशेष कृपा करते है और उसकी समस्त इच्छाओ की पूर्ति करते है।इस लिए जीवन में उन्नति-सफलता की कामना करने वालो को और कुंडली में स्थित शनि देव के अशुभ प्रभावों से मुक्त होने हेतु इनका पूजन करना चाहिए।

शनि पूजन  के प्रकार -वस्तुत शनि का पूजन सभी विशेष पर्व,त्यौहार या शनि अमावस्या में करते है,या किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु करते है,परन्तु विशेष प्रकार के पूजन व् मन्त्र-जाप-पाठ-हवन हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

शनि पूजन  के लाभ
शनि  पूजन से जीवन में सुख-समृद्धि में  वृद्धि होती है।
जीवन में बढ़ रही परेशानिया समाप्त  होती है।
शनि  पूजन से व्यापर नौकरी में सफलता मिलती है।
शनि  पूजन से शनि देव  के शुभ प्रभाव मिलते है और जीवन आनंन्दमय रहता है ।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण -सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प -संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन -मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन -पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन -किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन -गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन – पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन – नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन -वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान -इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप – पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन -मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती -भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन -तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज -पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा -विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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