28 अक्टूबर 2020

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लाल मूंगा

लाल मूंगा

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रंग :

लाल

आकृति और कट :

मिश्रित कटिंग

लाल मूंगा एक प्रकृतिक रत्न है।यह गहरे लाल,हलके लाल ,सिंदूरी,सफ़ेद रंग का मिलता है।यह रत्न देखने में बहुत आकर्षक होता है।

सामान्य परिचय : लाल मूंगा एक प्रकृतिक रत्न है।यह गहरे लाल,हलके लाल ,सिंदूरी,सफ़ेद रंग का मिलता है।यह रत्न देखने में बहुत आकर्षक होता है।लाल मूंगा मंगल ग्रह की शुभता के लिए धारण किया जाता है।लाल मूंगा धारण करने से शारीरिक,मानसिक व आर्थिक परेशानिया शांत होती है,शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बड़ती है,कार्यों में तेज़ी होती है।लाल मूंगा धारण करने से व्यक्ति को शाररिक विकार,कमजोरी,चोट,दुर्घटना,रक्त विकार,दर्द,मस्तिष्क वेदना,उचच रक्त चाप,कब्ज,पथरी,अल्सर,बवासीर,दस्त,शरीर में मॉस की कमी आदि की समस्या देता है।

लाल मूंगा धारण करने से व्यवसाय,नौकरी में आ रही बाँधा समाप्त होती है।        

लाल मूंगा के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को विशेष कर भोग-विलास,पद-प्रसिद्धि,मान-सम्मान,सफलता,शारीरिक पुष्टि,सहस,पराक्रम व आर्थिक लाभ मिलते है।

लाल मूंगा -सुरक्षा विभाग,गुप्त विभाग,सेना,यांत्रिक ऊर्जा,अभियंता,खिलाड़ी,ठेकेदार,दलाल,व्यापारी,राजनेता,अभिनेता,चिकित्सक ,उच्चाधिकारी,कला-साहित्य आदि से जुड़े व्यक्ति पहनना पसंद करते है।

।लाल मूंगा मेष लग्न,कर्क लग्न,सिंह लग्न,वृश्चिक लग्न,मकर व कुम्भ लग्न वाले व्यक्ति को धारण करना चाहिए।लाल मूंगा दुष्ट आत्माओं, जादू-टोना और बुरे स्वप्नों से  भी बचाता है।

भार व धातु-लाल मूंगा का शरीर के वजन के अनुसार धारण करना चाहिए या काम से काम 6 रत्ती या उस से अधिक धारण करना चाहिए।साथ ही लाल मूंगे को सोने व ताम्बे की अंगूठी पर धारण करना चाहिए।

पहनने का समय-लाल मूंगा रत्न चंद्र मॉस की  शुक्ल पक्ष में किसी भी मंगलवार के दिन सूर्योदय  के एक घंटे बाद धारण किया जाता है।

प्राण-प्रतिष्ठा-लाल मूंगे को सोमवार की रात्रि में कच्चे दूध में या गंगा जल में रखना चाहिए और प्रातः काल में  भगवान हनुमान जी का आवाहन करे प्रार्थना करे।लाल मूंगे को साफ जल से धोकर,लाल चन्दन लगाए,अक्षत चढ़ाये,धुप,दीप दिखाए और भगवान हनुमान से शुभता के लिए प्रार्थना करे।

मन्त्र-लाल मूंगे की प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात  लाल मूंगा धारण करने के लिए सर्व प्रथम निम्नलिखित मन्त्र  का 108 बार जाप करें-

मन्त्र वैदिक-ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।

अपां रेतां सि जिन्वति।।

मन्त्र तांत्रिक-ॐ अं अंङ्गारकाय नम:

मन्त्र बीज-ॐ  क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

अंगुली – मन्त्र-जाप के बाद, लाल मूंगे की अंगूठी को दाहिने हाथ की अनािमका (रिंग फिंगर) अंगुंली में धरण करना चाहिए।

विकल्प– लाल मूंगा के स्थान पर संग मुंगी (संग-सितारा) कार्वेलियन और रेड जास्पर (सूयर्कांत मणि ) जैसे विभन्न विकल्प रत्न भी उपयोग में लाये जा सकते है।

सावधानी-ध्यान रहें की  लाल मूंगे को पन्ना, हीरा,नीलम,गोमेद,लहसुिनया और उनके विकल्प  रत्नों के साथ नहीं पहना जाना चाहिए।

उत्पत्ति-सभी रत्न वस्तुतः खानो से प्राप्त होते है।लाल मूंगे की प्राप्ति बर्मा (म्यांमार), श्रीलंका (सिलोन), भारत, मेडागास्कर और तंजानिया की लाल मूंगे खानों से होती है।

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