28 अक्टूबर 2020

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क़र्ज़ निवारण हेतु पूजन

क़र्ज़ निवारण हेतु पूजन

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वैदिक विधान के अनुसार क़र्ज़- निवारण हेतु पूजन करने से जीवन मे सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस लिए क़र्ज़-निवारण पूजन अवश्य कराना चाहिए

सामान्य परिचय-व्यक्ति जीवन में धन की प्राप्ति हेतु बहुत मेहनत करता है,धन प्राप्ति के लिए अथक प्रयास करता है,परंतु धन प्राप्ति की जगह व्यक्ति के ऊपर क़र्ज़ की स्थिति घर कर लेती है।वस्तुतः देखा भी गया है कई व्यक्ति नए व्यवसाय,नोकरी,पारिवारिक समस्याओं के चलते,विदेश में शिक्षा के लिए,भूमि-भवन के लिए,संतान के लिए,किसी संसाधन के लिए या कोई भी अन्य कारण हेतु संचित धन ख़र्च करते है जिसमें नुक़सान होता है या बैंकों से क़र्ज़ लेते है पर न दे पाने के कारण भविष्य में यह क़र्ज़ बड़ जाता है।कारण कोई भी कैसा भी हो पर व्यक्ति के जीवन मे क़र्ज़ की स्थिति आ जाती है जिस से आर्थिक मंदी या आर्थिक परेशानी बड़ जाती है।व्यक्ति क़र्ज़ के चलते जीवन मे निराश व परेशान रहने लगता है।इन सब परेशानियों की निवृत्ति हेतु व कुंडली में अशुभ ग्रह-योगों,दोषों व अन्य किसी भी दोषों के चलते आयी परेशानी को शांत करने हेतु व क़र्ज़ से मुक्ति पाने हेतु क़र्ज़ निवृत्ति पूजन किया जाता है।

क्यूँ करे क़र्ज़ निवारण हेतु पूजन
क़र्ज़ निवृत्ति पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन से व्यक्ति के जीवन मे स्थित क़र्ज़ को दूर करने हेतु पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा अशुभ ग्रह-योगों व अन्य दोषों को शांत करने का सरल उपाय है।इस पूजन से ग्रहजन्य बाँधा को शांत किया जाता हैं,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न क़र्ज़ बाँधा समाप्त होती है ओर जीवन सुखमय व आनंदमय हो जाता है।

क़र्ज़ निवारण हेतु पूजन हेतु मुहूर्त-क़र्ज़ निवृत्ति पूजन  हेतु पूजन-पाठ,मंत्र-जाप,हवन,दान हमारे द्वारा दिशा निर्देश किए जाते हैं।

क़र्ज़ निवारण हेतु पूजन के लाभ
क़र्ज़ निवारण पूजन से जीवन मे उत्पन्न कष्टों,परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
क़र्ज़ निवारण पूजन से धन की स्थिति प्रबल होती है ओर क़र्ज़ की स्थिति से मुक्ति मिलती है।
अशुभ ग्रह व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।
जीवन को सुखमय,शांतिमय बनाने हेतु क़र्ज़ निवारण पूजन विशेष लाभकारी है।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।



वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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