29 नवंबर 2020

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नवरात्री पूजन

नवरात्री पूजन

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वैदिक विधान के अनुसार नवरात्रि पूजन करने से जीवन मे सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस लिए नवरात्रि संस्कार पूजन अवश्य कराना चाहिए।

सामान्य परिचय -नवरात्रि अर्थात् नौ रात्रि माँ दुर्गा को समर्पित है।नवरात्र माँ दुर्गा का पावन पर्व है,माँ के नौ रूपों का पूजन नवरात्र में किया जाता है।हिन्दू धर्म के अनुसार माँ दुर्गा नवरात्र के पावन पर्व में किसी ना किसी रूप में आकर हमारे समस्त दुःखों को दूर कर हमारी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।
नवरात्र का पर्व वर्ष में चार बार आता है,जिन्में दो महा नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष में व अश्विनी शुक्ल पक्ष में आते है और दो गुप्त नवरात्र माघ शुक्ल पक्ष में और आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आते है।नवरात्री के पावन पर्व में माँ दुर्गा का पूजन-पाठ,व्रत,दान आदि करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती है।

क्यों करे नवरात्री पूजन-नवरात्रि पूजन माँ दुर्गा के माहत्म्य को दर्शाता है,माँ के द्वारा महिषसुर के वध के साथ सृष्टि में धर्म की स्थापना और मनुष्य के कल्याण के लिए माँ के नो अवतारों  का प्राकट्य है।नवरात्री का पूजन प्रभु श्री राम ने लंका विजय के लिए भी किया और माँ के आशीर्वाद से भगवान् श्री राम विजय हुए,मनुष्य को सच्ची श्रद्धा,भक्ति,व्रत,और नियम से माँ का पूजन करना और माँ को प्रश्न करने हेतु मंत्र,जप,हवन, दान करना चाहिए।

नवरात्री पूजन के प्रकार-वस्तुत: नवरात्री पूजन वर्ष में चार बार आते  है,जिन्में दो महा नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष में व अश्विनी शुक्ल पक्ष में आते है और दो गुप्त नवरात्र माघ शुक्ल पक्ष में और आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आते है,किसी न किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु नवरात्री पूजन किया जाता है,परन्तु नवरात्री पूजन का समय,घट स्थापन का समय मन्त्र-जाप-पाठ-हवन दान इत्यादि हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

नवरात्री पूजन के लाभ-
नवरात्री पूजन सभी इच्छाओ को पूर्ण करने वाला है।
नवरात्री पूजन माँ दुर्गा की  कृपा व् आशीर्वाद हेतु किया जाता है।
नवरात्री पूजन धन-सम्पदा संबंधिति परेशानिया,लड़के/लड़की के विवाह में विलम्ब,संतान एवं क्लिष्ट रोग के अशुभ प्रभाव को शांत करता है ।
जीवन में अध्यात्म और भक्ति-मुक्ति को देने वाला होता है।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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