16 जुलाई 2020

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नवग्रह दोष पूजन

नवग्रह दोष पूजन

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वैदिक विधान के अनुसार नवग्रह दोष निवारण हेतु पूजन करने से जीवन मे सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस लिए नवग्रह दोष निवारण पूजन अवश्य कराना चाहिए

सामान्य परिचय -कुंडली में जब नवग्रह (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) अशुभ भाव,पाप योग,वक्री,अस्त,शत्रु राशि में होते है तो उनके अशुभ प्रभाव जीवन में अनेको बाँधा दुःख परेशानिया उत्त्पन्न करते है,जिसके चलते मनुष्य को शारीरिक,मानसिक,आर्थिक,भौतिक परेशानियों का सामना तो करना पड़ता है साथ ही जीवन में परिवार,संतान,प्रेम सम्बन्ध,दांपत्य जीवन,व्यवसाय,नौकरी एवं धन संबंधित बंधाओ का सामना भी करना पड़ता है,जिसके चलते जीवन में निराशा उत्पन्न होती है।क्युकी ग्रहो का प्रभाव किसी न किसी स्थिति में हमारे ऊपर पड़ता है,ग्रह शुभ स्थिति में है तो शुभ प्रभाव देते है और अगर यह पाप स्थिति में है तो इनके अशुभ प्रभाव भी मिलते है।

क्यों  करे नवग्रह दोष का पूजन -कुंडली में स्थित नवग्रहो के अशुभ प्रभावों को शांत करने हेतु और उनके द्वारा मिलने वाले शुभ प्रभावों की प्राप्ति हेतु नवग्रह पूजन विशेष लाभप्रद है,इस पूजन के करने से नवग्रह की विशेष कृपा व आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में उत्पन्न दुख,परेशानिया दूर होती है व जीवन में सुख,सुविधा,धन,वैभव,की वृद्धि होती है।

नवग्रह दोष पूजन  के प्रकार-वस्तुत नवग्रह दोषका पूजन सभी विशेष पर्व में करते है,या किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु करते है,परन्तु विशेष प्रकार के पूजन व् मन्त्र-जाप-पाठ-हवन हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

नवग्रह दोष पूजन  के लाभ
नवग्रह दोष पूजन से ग्रह कृत अशुभ प्रभाव शांत हो जाते है।
नवग्रह के शुभ प्रभाव की प्राप्ति होती है।
जीवन में शारीरिक,मानसिक,आर्थिक,पारिवारिक,सुख के साथ भौतिक सुख प्राप्त होता है।
जीवन में सफलता,उन्नति की प्राप्ति होती है।


कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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