16 जुलाई 2020

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माँ धूमावती मंत्र-जाप

माँ धूमावती मंत्र-जाप

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वैदिक विधान के अनुसार माँ धुमावती  की कृपा प्राप्ति हेतु 1.25,000मंत्र का जाप किया जाता है।जिसे पुरश्चरण कहा जाता है।
सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु माँ धुमावती के 1.25,000 मंत्रो का जाप कराना चाहिए।विशेष परिस्थिति अनुसार माँ धुमावती  के 51,000 मंत्रो का जाप भी करा सकते हैं।

सामान्य परिचय-माँ धूमावती देवी महाविद्याओं में सातवें स्थान पर विराजमान हैं। धूमावती महाशक्ति अकेली है तथा स्वयं नियंत्रिका है। इसका कोई स्वामी नहीं है। इसलिए इन्हें विधवा कहा गया है। धूमावती मंत्र-जाप,उपासना,पूजन  विपत्ति नाश, रोग निवारण, युद्ध जय आदि के लिए की जाती है। यह लक्ष्मी की ज्येष्ठा हैं, अतः ज्येष्ठा नक्षत्र में उत्पन्न व्यक्ति जीवन भर दुख भोगता है।जो मनुष्य अपने जीवन में निश्चिंत और निर्भीक रहना चाहते हैं उन्हें धूमावती के मंत्र-जाप,पूजन-पाठ अवश्य करना चाहिए।

क्यूँ करे माँ धूमावती मंत्र-जाप
माँ धूमावती के मंत्र-जाप से शत्रु बाधा,विपत्ति बाँधा,कोर्ट-केस,रोग समाप्त हो जाते हैं।माँ धूमावती  के मंत्र-जाप के द्वारा युद्ध में विजय की प्राप्ति होती हैं, धन-धान्य के लिए और इनकी उपासना भोग और मोक्ष दोनों के लिए की जाती है।

माँ धूमावती के मंत्र-जाप हेतु मुहूर्त-माँ धूमावती के मंत्र-जाप मनुष्य पर्व,त्योहार,ग्रहण,आदि में करते हैं।परंतु विशेष कृपा प्राप्ति हेतु मुहूर्त,माँ धूमावती पूजन,मंत्र-जाप,हवन,दान हमारे द्वारा दिशा निर्देश किए जाते हैं।

माँ धूमावती मंत्र-जाप के लाभ
माँ धूमावती के मंत्र-जाप से शत्रु बाधा,कोर्ट-केस,रोग,भय,मारण,मोहन,वशीकरण,उच्चाटन समाप्त हो  जाते हैं।
माँ धूमावती के मंत्र जाप करने से युद्ध मे विजय प्राप्ति होती हैं।
मनुष्य को जीवन मे इच्छित वस्तु का लाभ होता हैं।
माँ धूमावती के मंत्र-जाप के द्वारा धन-धान्य की प्राप्ति होती हैं।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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