29 नवंबर 2020

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मंगल चण्डिका पाठ

मंगल चण्डिका पाठ

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वैदिक विधान के अनुसार माँ मंगल चण्डिका  की कृपा प्राप्ति हेतु 1.25,000 मंत्र का जाप व पाठ किया जाता  है।जिसे पुरश्चरण कहा जाता है।
सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु माँ मंगल चण्डिका के 1.25,000 मंत्रो का जाप कराना चाहिए।विशेष परिस्थिति अनुसार माँ सरस्वती  के 51,000 मंत्रो का जाप भी करा सकते हैं।

सामान्य परिचय-मंगल चण्डिका पाठ माँ मंगल-चण्डिका की प्रसन्नता हेतु किया जाता हैं।पौराणिक मान्यता के अनुसार  माँ गौरी ने कठोर तपस्या के समय मंगल चण्डिका का पाठ,पूजन व्रत विधि विधान एवं श्रद्धा भक्ति से किया ओर माँ मंगल चण्डिका को प्रसन्न किया,माँ मंगल चण्डिका के आशीर्वाद से माँ गौरी ने इच्छित वर प्राप्ति हेतु भगवान शिव को प्राप्त किया।
मंगल चण्डिका स्त्रोत का पाठ-पूजन जो भी कुँआरी कन्या श्रद्धा-भक्ति के साथ करती है माँ मंगल चण्डिका के आशीर्वाद से उस कन्या को इच्छित वर की प्राप्ति होती है।
कुंडली में मंगल,शनि,राहु,केतु,सूर्य ग्रह के दोष व दाम्पत्य जीवन में उत्पन्न बाँधा,शीघ्र विवाह कामना हेतु माँ मंगल चण्डिका का पूजन-स्त्रोत-पाठ, व्रत विशेष लाभदायक होता है।

क्यूँ करे दुर्गा मंगल चण्डिका पाठ
मंगल चण्डिका का पाठ करने से मनुष्य दुःख,दरिद्रता का नाश  होता है।मनुष्य को कभी भय,पीड़ा,रोग नही सताते।शीघ्र विवाह,वैवाहिक सुख,संतान सुख,को देता है।ग्रह बाँधा का नाश करने वाला है मंगल चण्डिका पाठ।

मंगल चण्डिका  पाठ हेतु मुहूर्त-मंगल चण्डिका का पाठ मनुष्य नवरात्रि में,या व्रत,पर्व मे करते है,साथ ही किसी न किसी विशेष उद्देश्य हेतु मंगल चण्डिका का पाठ किया जाता है,परंतु विशेष मुहूर्त,मंगल चण्डिका पाठ-पूजन,मंत्र-जाप,हवन,दान हमारे द्वारा दिशा निर्देश किए जाते हैं।

मंगल चण्डिका पाठ के लाभ
माँ मंगल चण्डिका  की विशेष कृपा ओर आशीर्वाद प्राप्ति हेतु मंगल चण्डिका का  पाठ किया जाता हैं।
मंगल चण्डिका का पाठ करने से सभी इच्छा पूर्ण होती है।
शीघ्र विवाह हेतु कुँआरी कन्या करती हैं मंगल चण्डिका पाठ।
वैवाहिक सुख,संतान सुख,परिवार सुख को देता है।ग्रह बाँधा का नाश करने वाला है मंगल चण्डिका पाठ।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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