22 जनवरी 2021

तिथि

तक::

नक्षत्र

मू तक ::

योग

आयुष्मान तक ::

जन्माष्टमी पूजन

जन्माष्टमी पूजन

5,100.00
सभी करों का समावेश
अभी खरीदें

वैदिक विधान के अनुसार जन्माष्टमी पूजन करने से जीवन मे सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस लिए जन्माष्टमी पूजन अवश्य कराना चाहिए।

सामान्य परिचय-पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर पापीयों के नाश के लिए भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी रोहणी नक्षत्र के दिन अर्ध रात्रि मे कृष्ण रूप में देवकी के गर्भ से अवतार लिया।इस लिए भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।इस दिन भक्ति भाव से जो भी जन्माष्टमी का पूजन,व्रत करता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को स्मार्त ओर वैष्णव सम्प्रदाय बड़ी धूम-धाम से मानते है।स्मार्त सम्प्रदाय इस पर्व को चंद्रोदय व्यापनी अष्टमी तिथि रोहणी नक्षत्र मे मानते है।वैष्णव सम्प्रदाय इसे उदयकाल व्यापनी अष्टमी तिथि व उदयकाल व्यापनी रोहणी नक्षत्र में मानते है।यह पर्व सभी मनोरथ पूर्ण करने वाला और भक्ति आस्था को बड़ाने वाला माना जाता है।

क्यूँ करे जन्माष्टमी  पूजन -जन्माष्टमी पूजन करने से मनुष्य के पाप कर्म नष्ट हो जाते है,समस्त इच्छाएँ पूर्ण होती है,और मोक्ष की प्राप्ति होती है।इस पर्व को निष्ठा,भक्ति भाव,श्रद्धा के साथ किया जाता है।

जन्माष्टमी  पूजन के मुहूर्त -वस्तुत: जन्माष्टमी का पूजन सभी भाद्रपद मास कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि रोहणी नक्षत्र में करते है,इस पर्व को सभी किसी न किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु करते है,परन्तु विशेष प्रकार के पूजन व् मन्त्र-जाप-पाठ-हवन हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

जन्माष्टमी पूजन के लाभ
जन्माष्टमी के दिन पूजन से ज्ञान,बुद्धि,विद्या की प्राप्ति होती हैं।
जन्माष्टमी को भगवान कृष्ण की पूजा से दुःख,परेशानी दूर होती है,ओर जीवन में सफलता,सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
जन्माष्टमी पूजन से मोक्ष प्राप्ति होती है,ओर अंत काल भगवान के श्री धाम की प्राप्ति होती हैं।
जन्माष्टमी विशेष सिद्ध मुहूर्त होने से इस दिन सभी मंत्र साधना विशेष फलदायक होती हैं।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *