22 जनवरी 2021

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गणेश पूजन

गणेश पूजन

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वैदिक विधान के अनुसार भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति हेतु गणेश पूजन किया जाता है।सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु गणेश पूजन कराना चाहिए।

सामान्य परिचय – प्राचीन सनातनीय धर्म संस्कृति के अनुसार सभी शुभ एवं मांगलिक कार्यो को करने से पहले और समस्त देवी-देवता के पूजन से पहले भागवान गणेश की पूजा एवं अर्चना का विधान है,इस लिए भागवान गणेश को गणनायक की उपाधि भी दी गयी है।
भगवान् गणेश की पूजा,अर्चना करने से सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते है,साथ ही भगवान रिद्धि-सिद्धि,बल,बुद्धि,को देने वाले और सभी संकटो को हरने वाले है।

<क्यों  करे गणेश पूजन -सभी सांसारिक वस्तुओ की प्राप्ति हेतु व् जीवन में उत्पन्न विघ्न-बाँधा से मुक्ति प्राप्त करने हेतु भगवान् गणेश की पूजा करनी चाहिए,साथ ही जन्मकुंडली में बुध ग्रह की शांति हेतु भगवान् गणेश जी का पूजन,पाठ,ध्यान,मन्त्र जप,व् हवन विशेष लाभकारी होता है,और जीवन में उत्पन्न संकट,बंधाओ से मुक्त करने वाला होता है।

गणेश पूजन के प्रकार-वस्तुतः गणेश जी का पूजन सभी सामान्य तरीके से करते है परन्तु गणेश जी के पूजन के विशेष प्रकार व् मन्त्र-पाठ हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

गणेश पूजन के लाभ-
गणेश पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।विद्या,बुद्धि,धन,समृद्धि की प्राप्ति होती है।
घर में उत्पन्न दोष,गृह क्लेश,मानसिक अशांति,शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
व्यापर बाँधा व् बुध ग्रह के प्रकोप से शीघ्र शांति प्राप्त होती है।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अuuनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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