01 अप्रैल 2020

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गणेश चतुर्थी पूजन

गणेश चतुर्थी पूजन

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वैदिक विधान के अनुसार गणेश चतुर्थी पूजन करने से जीवन मे सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस लिए गणेश  चतुर्थी पूजन अवश्य कराना चाहिए।

सामान्य परिचय-गणेश चतुर्थी हर महीने में 2 बार आती है,शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी कहा जाता है। साथ ही जब यह चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं।
परंतु भद्रपद की चतुर्थी का शास्त्रों मे विशेष महत्व है क्यूँकि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।इस लिए आज भी गणेश चतुर्थी को हर्षों उल्लास से मनाया जाता है,ओर गणेश जी की कृपा हेतु उनका पूजन,व्रत किया जाता हैं।

क्यूँ करे गणेश चतुर्थी पूजन -भगवान गणेश हमारे  जीवन में हो रहे सभी कष्टों को हर लेते है,भगवान गणेश का स्मरण मात्र विघ्न-बाधाओं को दूर कर देता है।कुंडली में उत्पन्न दोषों ओर जीवन में बड़ रही परेशनियाँ रोग,क्लेश,धन हानि,सन्तान कष्ट,व्यापार बांधा,आर्थिक मंदी,विवाह सुख में विलम्ब जैसी सभी समस्याओं से मुक्ति पाने हेतु गणेश चतुर्थी पूजन किया है।

गणेश चतुर्थी पूजन के प्रकार-वस्तुत गणेश चतुर्थी  पूजन भद्रपद में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मानते है,मनुष्य किसी न किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु यह पूजन करता है,परन्तु विशेष प्रकार के पूजन व् मन्त्र-जाप-पाठ-हवन हमारे द्वारा दिशा निर्देश किये जाते है।

गणेश चतुर्थी के लाभ
गणेश चतुर्थी पूजन,व्रत करने से मनुष्य के जीवन मे उन्नती,सफलता आती है,साथ ही सभी इच्छाएँ पूर्ण होती है।
चतुर्थी पूजन प्रेम, विवाह व संतान  की इच्छा रखने वालों के लिए सिद्धी दायक है।
चतुर्थी का पूजन हमारी आस्था,भक्ति को प्रबल करने वाला है,इसको करने से अध्यात्म में मनुष्य की श्रद्धा बड़ती है।

कैसे किया जाता है पूजन

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा पूजन वैदिक रीति अनुसार किया जाता है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

वैदिक पूजन प्रक्रिया

1-मंगलाचरण-सर्व प्रथम पूजन प्रारम्भ हेतु सभी गुरुओं,देवी-देवता,इष्ट देव,पितरों आदि का वंदन मंगलकामना हेतु किया जाता है।

2-संकल्प-संकल्प पूजन का विशेष अंग होता है,इसके द्वारा यजमान के नाम,गोत्र,वर्ण काल आदि की स्थिति को बताया जाता है,पूजन का उद्देश्य व व्यक्ति की मनोकामनाओं को संकल्प द्वारा सिद्ध किया जाता है।

3-स्वस्ति वाचन-मंगलकामना हेतु वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

4-गणेश पूजन-पूजन मण्डल व यज्ञ की निर्विघ्नता हेतु भगवान गणेश का पूजन व स्थापन किया जाता है,भगवान गणेश के आशीर्वाद से पूजन व यज्ञ का पूर्ण फल यजमान को प्राप्त होता है।

<5-कलश पूजन-किसी भी पूजन व यज्ञ में कलश पूजा का विशेष महत्व है।कलश पूजन सुख-समृद्धि के साथ यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है।

6-पंचांग पीठ पूजन-गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पीठ पूजन का विधान है।पंचांग पीठ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश पूजन,मातृका पूजन आदि किया जाता है।

7-पुण्याहवाचन– पुण्यहवाचन अर्थात पुण्यवचन।पूजन व यज्ञ मे सम्पूर्ण फल की प्राप्ति हेतु पुण्यवचनो द्वारा यजमान के लिए प्रार्थना की जाती है।

8-नवग्रह पूजन– नव ग्रह अर्थात (सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु) का आवहन स्थापन व पूजन ग्रह कृत बाँधा दूर करने हेतु किया जाता है व पूजन व यज्ञ द्वारा ग्रहो के शुभ फल की  प्राप्ती हेतु प्रार्थना की जाती है।

9-दिक्पाल,लोकपाल व क्षेत्रपाल पूजन-वैदिक परम्परा अनुसार चार दिशाएँ,चार उपदिशाए,आकाश,पाताल व क्षेत्र के देवता का आवहन पूजन व स्थापन निर्विघ्नता हेतु किया जाता है।

10-प्रधान देव पूजन या सर्वतो भद्र पूजान-इस पूजन में यज्ञ के प्रधान देव का विशेष प्रकार से आवहन,स्थापन व पूजन किया जाता है।

11-मंत्र-जाप– पूजन उपरान्त मंत्रों का जाप किया जाता है।

12- हवन-मंत्र व पूजन की पूर्णता हेतु अंत में दशांश हवन जाप मंत्रो द्वारा ही किया जाता है।

<13-आरती-भगवान की प्रसन्नता हेतु आरती की जाती है।

14-तर्पण और मार्जन-तर्पण व मार्जन करने से पूजन व यज्ञ में अज्ञानता वश किए गए दोष की शांति की जाती है।

15- ब्राह्मण भोज-पूजन व यज्ञ की समाप्ति हेतु ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जाता है व श्रद्धा-भक्ति से भोजन कराया जाता है,यह भी पुण्य फल प्राप्ति हेतु पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।

16-प्रसाद -अंत में सभी मनोकामनाओं व पुण्य फल की प्राप्ति हेतु ब्राह्मण व आचार्यों द्वारा आशीर्वाद हेतु आपको प्रसाद भेजा जाएगा।

17-वीडियो की सुविधा-विडियो व ओडीयो कोल के माध्यम से आप पूजन प्रक्रिया से जुड़ सकते है,आपके निमित्त किया गया सम्पूर्ण पूजन  विडियो के माध्यम से आपके ई-मेल व्हटसऐप नंबर पर भी उपलब्ध कराया जाता है।

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