29 नवंबर 2020

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संस्कार पूजन

सामान्य परिचय– हिन्दू धर्म मे संस्कारो पर विशेष महत्व दिया गया है।जीव के गर्भ मे आने से मृत्यु शय्या तक व्यक्ति संस्कारो से बाँधा हुआ है।हिन्दू धर्म में संस्करो की संख्या 16 बतायी गयी है और जन्म समय से लेकर समय-समय पर वैदिक परम्परा व विधि-विधान द्वारा संस्कारो का आयोजन किया जाता है।संस्कार पूजन विशेष पर्व,मुहूर्त मे सम्पन्न किए जाते है तथा संतान पर इसका सकारात्मक प्रभाव आए इस लिए संस्कारो को पूजन-पाठ,मंत्रोचार-जाप,हवन-दान, व्रत नियम इत्यादि द्वारा सम्पन्न किया जाता है।हमारे द्वारा संस्कार पूजन वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पन्न किए जाते है,हमारे द्वारा संस्कार पूजन मे मुहूर्त,पूजन पद्धति,मंत्रोचार व विधि-विधान पर विशेष ध्यान दिया जाता है,ताकि संस्कार पूजन का पूर्ण फल संतान को प्राप्त हो।मंगलकामनाओं की पूर्णता हेतु ईश्वर से प्रार्थना की जाती है।

कैसे करे संस्कार पूजन -संस्कार पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन मे संस्करो पर बल दिया जाता है।संस्कारों के ठीक से होने से संतान के मन,मस्तिष्क,बुद्धि सकारात्मक होती है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन द्वारा संतान के लिए उज्वल भविष्य,स्वस्थ्य शरीर व मंगल कामना की जाती है  व कामना पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा देव व ग्रह से प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से संतान के जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन आते है,चंचलता,क्रोध,उग्रता का नाश होता है।संस्कार विशेष पूजन से यथा संस्कार फल की प्राप्ति होती है।

संस्कार पूजन के लाभ-संस्कार  पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्नबाँधा,परेशानी,कष्टों का नाश होता है।संस्कार पूजन विशेष पूजन है अतः संस्कार पूजन के अनुसार ही संतान को फल की प्राप्ति होती है। संस्कार पूजन कामनाओं को पूर्ण करता है,संस्कार पूजन से ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।संस्कार  पूजन करने से ग्रह की स्थिति को पुष्ट किया जाता है।