26 नवंबर 2020

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नवग्रह पूजन

सामान्य परिचय– नवग्रह पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन में नव ग्रह (सूर्य,चंद्रमा,मंगल,बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि,राहु,केतु)जो भी ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति,शत्रु भाव,अस्त,वक्री होता है उस विशेष ग्रह के दोष की शांति हेतु पूजन किया जाता है।नवग्रह पूजन में ग्रह विशेष का वैदिक रितियो द्वारा वैदिक मंत्र,तांत्रिक मंत्र,बीज मंत्र-जाप,पूजा-पाठ,हवन-दान आदि द्वारा अशुभ प्रभावों को शांत किया जाता है तथा ग्रह के शुभ प्रभावों के लिए उचित प्रार्थना व उपाए किए जाते है।इसके परिणाम स्वरुप ग्रह के शुभ फलों की प्राप्ति होती है।व्यक्ति की कुंडली में उत्पन्न दोष शांत होते है और शुभ प्रभाव से जीवन मे सुख-समृद्धि,धन-धान्य व भाव विशेष के शुभ फल की प्राप्ति होती है।

कैसे करे नवग्रह पूजन -नवग्रह पूजन या ग्रह पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन मे व्यक्ति इच्छा पूर्ति हेतु ग्रह विशेष का चयन करता है। व्यक्ति के जीवन मे स्थित समस्त दोषों को दूर करने हेतु ग्रह पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन से व्यक्ति के उद्देश्य व कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा ग्रह से प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा समाप्त होती है और शीघ्र ही व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है।ग्रह पूजन के परिणाम दीर्घकाल तक रहते है।

नवग्रह पूजन के लाभ-नवग्रह पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा,परेशानी,कष्टों से मुक्ति मिलती है।नवग्रह पूजन विशेष कामनाओं को पूर्ण करता है,इसके परिणाम शीघ्र मिलते है। ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।ग्रह पूजन करने से ग्रह की स्थिति को पुष्ट किया जाता है।