08 अगस्त 2020

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हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है,पूजा-पाठ करने से आद्यात्मिक शांति तो मिलती है,साथ ही पूजा-पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और जीवन में हम हर उस वस्तु को प्राप्त कर सकते है,जिसकी इच्छा हमारे मन में सदैव रहती है।हम यह भी कह सकते है,समस्त इच्छाओ की पूर्ति या कामनाओ को पूर्ण करने के लिए पूजा-पाठ,मन्त्र,तंत्र,उपासना का सहारा लिया जाता है,या इन को सकाम भाव हेतु किया जाता है। वस्तुता हिन्दू धर्म ही नहीं अपितु इस पृथ्वी पर हर धर्म,समाज,सभ्यता के लोग अपनी परम्पराओ के अनुसार पूजा-पाठ अनुष्ठान करते है और हर उस वस्तु को प्राप्त करने के लिए शारीरिक व् आध्यात्मिक प्रयोग करते है,जिस से उनकी समस्त कामनाओ की पूर्ति शीघ्र हो सके।

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भगवान पूजन 14 पूजाएं

सामान्य परिचय– भगवान पूजन विशेष व प्रधान देव पूजन के अंतर्गत आता है।इस पूजन में व्यक्ति अपनी इच्छा पूर्ण करने हेतु व कामनाओं की सिद्धि हेतु पूजन करता है।व्यक्ति अपने उद्देश्य व कामना हेतु प्रधान देव जैसे विघ्नो के हरण हेतु गणेश जी का पूजन करता है,विद्या प्राप्ति हेतु माँ सरस्वती व धन की प्राप्ति हेतु माँ लक्ष्मी का पूजन करता है,व्यक्ति अपने उद्देश्य व कमाओ के अनुरूप प्रधान देव का चयन करता है व पूजन-पाठ,मंत्र-जाप,हवन-दान प्रधान देव की प्रसन्नता हेतु करता है।यह समग्र पूजन प्रधान देव को समर्पित होता है व आशीर्वाद व कामना पूर्ति हेतु विशेष प्रकार से आयोजित किया जाता है।

कैसे करे भगवान का पूजन– भगवान पूजन या प्रधान देव पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन मे व्यक्ति इच्छा पूर्ति हेतु प्रधान देव का चयन करता है। व्यक्ति के जीवन मे स्थित समस्त दोषों को दूर करने हेतु प्रधान देव पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन से व्यक्ति के उद्देश्य व कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा प्रधान देव से प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा समाप्त होती है और शीघ्र ही व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है।प्रधान देव पूजन के परिणाम दीर्घकाल तक रहते है।

भगवान पूजन के लाभ– भगवान पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा,परेशानी,कष्टों से मुक्ति मिलती है।भगवान पूजन विशेष कामनाओं को पूर्ण करता है,इसके परिणाम शीघ्र मिलते है।अशुभ ग्रह व अन्य दोषों के प्रभावों को भी शांत किया जाता है।यह पूजन भक्ति व मुक्ति प्रदान करने वाला होता है।

दोष निवारण पूजन 7 पूजाएं

सामान्य परिचय– दोष निवारण पूजन एक विशेष पूजन है।दोष निवारण पूजन जीवन मे उत्पन्न विघ्न-बाँधा,कष्ट,परेशानियों की शांति हेतु वैदिक विधियों द्वारा किया जाता हैं।दोष निवारण पूजन मे कुंडली में स्थित प्रधान दोषों को दूर करने व उन दोषों से उत्पन्न परेशानियों से मुक्ति हेतु यह पूजन किया जाता है।दोष निवारण पूजन में ग्रह कृत बाँधा व अन्य दोषों द्वारा उत्पन्न बाँधाओ को हमारे विद्वान आचार्य कुंडली के विश्लेषण द्वारा देख कर व्यक्ति को बताते है,व्यक्ति विशेष को अगर इन दोषों की जानकारी होती है तो वह भी इन दोषों की शांति हेतु पूजन करा सकता है।दोष निवारण पूजन के परिणाम शीघ्र मिलते है,जिसके फल स्वरूप व्यक्ति के जीवन मे सुख-समृद्धि,धन-धान्य की प्राप्ति होती है।विशेष उद्देश्य हेतु की गयी दोष निवारण पूजन सफल व कामनाओं को पूर्ण करती है।

कैसे करे दोष निवारण पूजन
दोष निवारण पूजन  विशेष पूजन है।इस पूजन मे व्यक्ति इच्छा पूर्ति हेतु कुंडली में स्थित दोष व अन्य दोष विशेष का चयन करता है। व्यक्ति के जीवन मे स्थित दोष को दूर करने हेतु दोष निवारण पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन से व्यक्ति के उद्देश्य व कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा  प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न दोष व बाँधा समाप्त होती है और शीघ्र ही व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है।

दोष निवारण पूजन के लाभ
दोष निवारण पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा,परेशानी,कष्टों से मुक्ति मिलती है।
दोष निवारण पूजन विशेष कामनाओं को पूर्ण करता है,इसके परिणाम शीघ्र मिलते है।
दोष निवारण पूजन से ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।
दोष निवारण पूजन करने से शारीरिक,मानसिक,संतान,विवाह आदि सुख की प्राप्ति होती है।

उत्सव पूजन 16 पूजाएं

सामान्य परिचय – उत्सव पूजन विशेष पूजन है।यह पूजन विशेष पर्व,उत्सव,व्रत आदि के लिए किए जाते है।इस पूजन में मुहूर्त आदि की शुद्धि,पूजन पद्धति,नियम आदि का विशेष ध्यान रखा जाता है,वार्षिक पूजन की श्रेणी मे आने से इसका महत्व विशेष बड़ जाता है।व्यक्ति हर्षों-उल्लास के साथ परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिल कर उत्सव पूजन को करते है,परिवार के सभी सदस्यों की मंगल कामनाओं को पूर्ण करने हेतु या विशेष पर्व,व्रत में विशेष कामना हेतु उत्सव पूजन को लोकाचार व वैदिक रितियो-परम्पराओं के अनुसार किया जाता है।उत्सव पूजन करने से विशेष फल व कामनाओं की सिद्धि होती है।

कैसे करे उत्सव पूजन
उत्सव पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन मे व्यक्ति इच्छा पूर्ति हेतु विशेष व्रत,पर्व,उत्सव का चयन करता है। व्यक्ति के जीवन मे स्थित समस्त दोषों को दूर करने हेतु उत्सव पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन से व्यक्ति के उद्देश्य व कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा समाप्त होती है और व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है।उत्सव पूजन के परिणाम दीर्घकाल तक रहते है।

उत्सव  पूजन के लाभ
उत्सव  पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा,परेशानी,कष्टों से मुक्ति मिलती है।
उत्सव पूजन विशेष कामनाओं को पूर्ण करता है।
उत्सव पूजन द्वारा संतान सुख,विवाह सुख, मिलता है।
ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।
उत्सव पूजन करने से समस्त देवी-देवताओं द्वारा आशीर्वाद की प्राप्ति होती है व ग्रह की स्थिति पुष्ट होती है।

मंत्र-जाप 20 पूजाएं

सामान्य परिचय– पौराणिक मान्यता के अनुसार शास्त्रों मे मंत्र-जाप पर विशेष ज़ोर दिया है।किसी भी कार्यों की पूर्णता पूजन-पाठ,उपासना आदि  मंत्र द्वारा सम्पन्न होती है।इस लिए मंत्र का महत्व अधिक हो जाता है।मंत्र कई प्रकार के होते है,लौकिक,वैदिक,तांत्रिक,बीज,साबर इत्यादि।व्यक्ति जिस भी कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्र-जाप करता या विद्वान आचार्यों से करवाता है,वह अवश्य ही पूर्ण होते है।मंत्रो मे दिव्य ऊर्जा होने से वह व्यक्ति की कामना को पूर्ण करने का समर्थय रखते है।इस लिए मंत्र-जाप व पाठ द्वारा व्यक्ति विशेष कामनाओं की प्राप्ति कर सकता है।हमारे द्वार विद्वान आचार्य मंत्र-जाप को विशेष मुहूर्त,पर्व,त्योहार व उद्देश्य की पूर्ति हेतु सम्पन्न करते है।हमारे द्वारा मुहूर्त,विधि-विधान,मंत्रोचार पर विशेष ध्यान दिया जाता है,साथ ही मंत्र-जाप व पाठ के नियम भक्ति,शुद्धि,आसन,आचार,धारण,प्राणक्रिया,मुद्रा,तर्पण,हवन,मंत्र-जाप आदि वैदिक पद्धति के अनुसार सम्पन्न किए जाते है,ताकि मंत्र-जाप का पूर्ण फल व जिस कामना हेतु मंत्र-जाप,पाठ किया गया है व्यक्ति(यजमान) को उसका पूर्ण फल प्राप्त हो।

कैसे करे मंत्र-जाप व पाठ -मंत्र-जाप व पाठ एक विशेष कामना हेतु किए जाते है।मंत्र-जाप व पाठ  द्वारा व्यक्ति इच्छा पूर्ति हेतु विशेष मंत्र-जाप व पाठ का चयन करता है। व्यक्ति के जीवन मे स्थित समस्त दोषों को दूर करने हेतु मंत्र-जाप,पाठ पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन से व्यक्ति के उद्देश्य व कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा ग्रह से प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा समाप्त होती है और मंत्र-जाप,पाठ द्वारा व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है।मंत्र-जाप व पाठ पूजन के परिणाम दीर्घकाल तक रहते है।

मंत्र-जाप व पाठ पूजन के लाभ-मंत्र-जाप व पाठ पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा,परेशानी,कष्टों से मुक्ति मिलती है। मंत्र-जाप व पाठ पूजन विशेष कामनाओं को पूर्ण करता है, ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।मंत्र-जाप व पाठ पूजन करने से ग्रह की स्थिति को पुष्ट किया जाता है।

संस्कार पूजन 10 पूजाएं

सामान्य परिचय– हिन्दू धर्म मे संस्कारो पर विशेष महत्व दिया गया है।जीव के गर्भ मे आने से मृत्यु शय्या तक व्यक्ति संस्कारो से बाँधा हुआ है।हिन्दू धर्म में संस्करो की संख्या 16 बतायी गयी है और जन्म समय से लेकर समय-समय पर वैदिक परम्परा व विधि-विधान द्वारा संस्कारो का आयोजन किया जाता है।संस्कार पूजन विशेष पर्व,मुहूर्त मे सम्पन्न किए जाते है तथा संतान पर इसका सकारात्मक प्रभाव आए इस लिए संस्कारो को पूजन-पाठ,मंत्रोचार-जाप,हवन-दान, व्रत नियम इत्यादि द्वारा सम्पन्न किया जाता है।हमारे द्वारा संस्कार पूजन वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पन्न किए जाते है,हमारे द्वारा संस्कार पूजन मे मुहूर्त,पूजन पद्धति,मंत्रोचार व विधि-विधान पर विशेष ध्यान दिया जाता है,ताकि संस्कार पूजन का पूर्ण फल संतान को प्राप्त हो।मंगलकामनाओं की पूर्णता हेतु ईश्वर से प्रार्थना की जाती है।

कैसे करे संस्कार पूजन -संस्कार पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन मे संस्करो पर बल दिया जाता है।संस्कारों के ठीक से होने से संतान के मन,मस्तिष्क,बुद्धि सकारात्मक होती है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन द्वारा संतान के लिए उज्वल भविष्य,स्वस्थ्य शरीर व मंगल कामना की जाती है  व कामना पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वारा देव व ग्रह से प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से संतान के जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन आते है,चंचलता,क्रोध,उग्रता का नाश होता है।संस्कार विशेष पूजन से यथा संस्कार फल की प्राप्ति होती है।

संस्कार पूजन के लाभ-संस्कार  पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्नबाँधा,परेशानी,कष्टों का नाश होता है।संस्कार पूजन विशेष पूजन है अतः संस्कार पूजन के अनुसार ही संतान को फल की प्राप्ति होती है। संस्कार पूजन कामनाओं को पूर्ण करता है,संस्कार पूजन से ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।संस्कार  पूजन करने से ग्रह की स्थिति को पुष्ट किया जाता है।

उद्देश्य हेतु पूजन 9 पूजाएं

सामान्य परिचय– उद्देश्य पूजन एक विशेष पूजन है।यह  पूजन व्यक्ति के द्वारा इच्छित विशेष उद्देश्यों की पूर्णता हेतु वैदिक विधि-विधान,पूजन-पाठ,मंत्र-जाप,व्रत,हवन,दान व नियमों का पालन कर इच्छित कामना को प्राप्त करने हेतु किया जाता है।यह पूजन वैदिक रीति अनुसार विशेष मुहूर्त,पर्व,उत्सव में विद्वान आचार्यों द्वारा सम्पन्न किया जाता है।व्यक्ति के जीवन मे विघ्न-बँधाओ,कष्टों,परेशानियों,ग्रह दोष व अन्य दोष से उत्पन्न समस्या को उद्देश्य पूजन द्वार शांत किया जाता है।व्यक्ति की कामना पूर्ण हो इस का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।हमारे विद्वान आचार्यों द्वारा नियम व विधि का विशेष ध्यान रखा जाता है,ताकि व्यक्ति का पूजन सफल हो।मंत्रोचार द्वारा प्रार्थना की जाती है की उद्देश्य पूजन का फल व्यक्ति को शीघ्र प्राप्त हो।

कैसे करे उद्देश्य पूजन
उद्देश्य पूजन एक विशेष पूजन है।इस पूजन मे व्यक्ति इच्छा पूर्ति हेतु विशेष पूजन का चयन करता है। व्यक्ति के जीवन मे स्थित समस्त दोषों को दूर करने हेतु उद्देश्य पूजन किया जाता है।यह पूजन वैदिक रितियो द्वारा सम्पन्न किया जाता है।इस पूजन से व्यक्ति के उद्देश्य व कामना को पूर्ण करने हेतु मंत्रोचर द्वार प्रार्थना की जाती है,जिसके परिणाम से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा समाप्त होती है और शीघ्र ही व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है।उद्देश्य पूजन के परिणाम दीर्घकाल तक रहते है।

उद्देश्य पूजन के लाभ
उद्देश्य पूजन से व्यक्ति के जीवन मे उत्पन्न समस्त बाँधा,परेशानी,कष्टों से मुक्ति मिलती है।
उद्देश्य पूजन विशेष कामनाओं को पूर्ण करता है,इसके परिणाम व्यक्ति को मिलते है।
उद्देश्य पूजन द्वारा ग्रह के अशुभ प्रभावों व अन्य दोषों के प्रभावों को शांत किया जाता है।
उद्देश्य पूजन करने से व्यक्ति की समस्याओं का निवारण होता है।

पूजा

हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है,पूजा-पाठ करने से आद्यात्मिक शांति तो मिलती है,साथ ही पूजा-पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और जीवन में हम हर उस वस्तु को प्राप्त कर सकते है,जिसकी इच्छा हमारे मन में सदैव रहती है।हम यह भी कह सकते है,समस्त इच्छाओ की पूर्ति या कामनाओ को पूर्ण करने के लिए पूजा-पाठ,मन्त्र,तंत्र,उपासना का सहारा लिया जाता है,या इन को सकाम भाव हेतु किया जाता है।
वस्तुता हिन्दू धर्म ही नहीं अपितु इस पृथ्वी पर हर धर्म,समाज,सभ्यता के लोग अपनी परम्पराओ के अनुसार पूजा-पाठ अनुष्ठान करते है और हर उस वस्तु को प्राप्त करने के लिए शारीरिक व् आध्यात्मिक प्रयोग करते है,जिस से उनकी समस्त कामनाओ की पूर्ति शीघ्र हो सके।

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