29 सितंबर 2020

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जनवरी - 2019
8 आयोजन
वर्ष :
1st
मंगलवार

new year

13th
रविवार

Lohri parva

13th
रविवार

Guru govind praksh-uttsav

14th
सोमवार

Makar sankranti (magh-sankranti)

17th
गुरुवार

Putrda ekadashi vrat

21st
सोमवार

Poush purnima

21st
सोमवार

Shri ganesh sankashti chaturthi

26th
शनिवार

Gantantr divash

फ़रवरी - 2019
13 आयोजन
वर्ष :
4th
सोमवार

Ardhkumbh (pryag)

4th
सोमवार

(Magh) moni amawasya

4th
सोमवार

Somvati amawasya

8th
शुक्रवार

Gori tritiya

8th
शुक्रवार

Shri ganesh til chaturthi

9th
शनिवार

वसंत पंचमी

सामान्य परिचय-वसंत पंचमी या माघ पंचमी माँ सरस्वती को समर्पित है,इस दिन माँ सरस्वती का पूजन किया जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माँ सरस्वती प्रकट हुई थी,इस लिए इस दिन को माँ सरस्वती के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।माँ सरस्वती ज्ञान,बुद्धि,विद्या को देने वाली है।जो भी मनुष्य विधि-विधान से इस दिन माँ की पूजा,अर्चना,व्रत,दान करता है माँ की कृपा सदैव उस पर बनी रहती हैं।वसंत पंचमी का महत्व इस लिए भी महत्व पूर्ण है क्युकी इस दिन वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है,कण-कण खिल उठता है,पेड-पौधो में नए पत्ते-फूल खिलना प्रारम्भ कर देते है,सभी जगह प्राकृतिक सौन्दर्य उत्त्पन्न होने लगता है।इस दिन सभी प्राणियों में नयी चेतना का विकास होता। इस दिन सभी माँ सरस्वती का पूजन व कामदेव का पूजन किया जाता है,पीत वस्त्र अर्थात पीले वस्त्रो को धारण किया जाता है,सभी शस्त्रों,पुस्तकों,वाद्य यंत्र कला सामग्री का पूजन करते है,और माँ सरस्वती से विद्या बुध्दि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते है। माँ सरस्वती का पूजन कला,साहित्य,वक़्ता,अभिनेता,शिक्षक ओर वाणी के प्रयोग से आय प्राप्त करने वालों के लिए विशेष लाभदायक सिद्ध होती हैं।

मां सरस्वती की उत्पत्ति कथा - माँ सरस्वती उस अनादि ब्रह्म की ज्ञानमयी शक्ति का नाम है जो की नित्य आनंद स्वरूपा है तथा जो प्रकृति के बंधनों से सर्वथा परे हैं फिर भी अपने भक्तों के लिए माँ सरस्वती ने माघ शुक्ल पंचमी के दिन अवतार ग्रहण किया । पुराणों के अध्ययन से यह पता चलता है कि जब विधाता ब्रह्मा इस सृष्टि का शुभारम्भ कर रहे थे तो उनकी वाणी से परम सुन्दर युवती को जन्म दिया जिसका नाम कि सरस्वती था कई जगहों पर इन्हे शतरूपा के नाम से भी जाना जाता है जो कि उचित नहीं है क्यूंकि देवी शतरूपा का जन्म तो ब्रह्मा जी के वाम अंग से हुआ था और दक्षिण अंग से महाराज मनु का जिनकी संतान होने के कारण प्रत्येक मनुष्य को मानव कहा जाता है । अन्य तथ्यों के आधार पर सृष्टि की उत्पति करने के बाद जब ब्रह्मा जी ने देखा की संसार में सब सुख और भोग है परन्तु प्राणियों में ज्ञान की कमी के कारण उन उपभोगो का कुछ लाभ नहीं हो रहा तो, ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुईं. उस स्‍त्री के एक हाथ में वीणा और दूसरा हाथ वर मुद्रा में थी . बाकि दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी. ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया. जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी मिल गई. जल धारा कोलाहल करने लगी. हवा सरसराहट कर बहने लगी. तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा. सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणा वादनी और वाग्देवी समेत कई नामों से पूजा जाता है. वो विद्या, बुद्धि और संगीत की देवी हैं. ब्रह्मा ने देवी सरस्‍वती की उत्‍पत्ती बसंत पंचमी के दिन ही की थी. इसलिए हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्‍वती का जन्‍म दिन मनाया जाता है।

कैसे मनाये वसंत पंचमी के पर्व को-वसंत पंचमी के दिन प्रातः काल स्नान करने के उपरांत माँ सरस्वती व कामदेव का विधि-विधान से पूजन करना चाहिए।विद्या,ज्ञान,बुद्धि की प्राप्ति के लिए माँ सरस्वती के स्त्रोतों का पाठ व मन्त्र जाप शुभ फल देने वाला होता है,माँ सरस्वती को मिष्ठान व खीर का भोग लगाया जाता है,पीत वस्त्रो को धारण किया जाता है साथ ही पीत वस्त्रो व वस्तुओ का दान किया जाता है। वसंत पंचमी के दिन पूजन करने से जीवन में अज्ञान,अंधकार,वाणी दोष,शिक्षा में आ रही विघ्न-बाँधा दूर हो जाती हैं।माँ सरस्वती के आशीर्वाद से समाज में पद,प्रतिष्ठा,ज्ञान व सफलता की प्राप्ति होती है,इस लिए बसन्त पंचमी के दिन पूजन करना शुभता को देने वाला होता है।कुंडली में पंचम भाव,बुध,बृहस्पति,शुक्र की स्थिति ख़राब होने पर बसन्त पंचमी को माँ सरस्वती की पूजा करने से ग्रह कृत दोष समाप्त होते हैं।

वसंत पंचमी पर्व का शुभ मुहूर्त- वसंत पंचमी पर्व शुभ मुहूर्त-इस वर्ष यह वसंत पंचमी पर्व 10 फरवरी 2019 को मनाया जायेगा।(दिल्ली प्रदेश) शुभ मुहूर्त :07:10: से 12:41:00 तक अवधि :5 घंटे 31 मिनट

9th
शनिवार

माँ सरस्वती पूजन

माँ सरस्वती पूजन विधान माँ सरस्वती की पूजा सभी को करनी चाहिए,जीवन में विद्या,बुद्धि,यश,कीर्ति,सफलता,एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति हेतु माँ की पूजा,मंत्र,जप,उपासना,दान इत्यादि करना शुभ फल देने वाला है। माँ सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी में की जाती है,सर्व प्रथम शुद्ध मन एवं भक्ति भाव के साथ पूजा के स्थान में श्वेत आसन में बैठ कर ज्ञानदायिनी माँ शारदा की स्तुति करे।फिर माँ की पंचोपचर (पद्य,अर्घ्य,आसन,आचमन,स्नान) करना चाहिए।तत्पश्चात धूप,दीप,वस्त्र,नैवध्य,फल,फूल इत्यादि माँ को अर्पित करे। माँ के मंत्रो का जप 108 बार करे।फिर माँ की आरती विधिवत करे।ध्यान दे पूरे दिन व्रत का पालन करे।

माँ सरस्वती का ध्यान- या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।। शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं । वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।। हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् । वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।। जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें। शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूं..इस प्रकार भक्ति पूर्वक वंदना करने के पश्चात माता का विधिवत पूजन कर तुलसी अथवा रुद्राक्ष कि माला से माँ सरस्वती के मन्त्र यथा शक्ति के अनुसार जप करें जप के पूर्ण होने के पश्चात जल लेकर माता के वाम हस्त में जप का अर्पण करें । जप हेतु मन्त्र निम्न है -

माँ सरस्वती का मन्त्र - ॐ ह्रीं वद वद वाग्-वादिनि स्वाही ह्रीं ॐ । ॐ ऐं ह्रीं सरस्वतै नमः,

माता सरस्वती के जितने स्वरूपों का वर्णन ग्रंथों में प्राप्त होता है उन सब का विधान भी अलग - अलग है आप उन मन्त्रों में से अपनी इच्छा के अनुसार किसी अन्य मन्त्र का भी जप कर सकते हैं परन्तु ध्यान रहे कि मन्त्र ऐसा न हो माँ का तामसिक और रौद्र स्वरुप का द्योतक हो ऐसे मन्त्र के जपने से अनर्थ हो सकता है अतः सौम्य रूप में ही माँ का पूजन जप इत्यादि करें । विधिवत पूजा आदि करने के पश्चात तथा जप करने के बाद आप माँ वीणावादनी कि प्रसन्नता हेतु स्तोत्र कवच स्तुति आदि का पाठ करें

विशेष : माता सरस्वती के विषय में इतना अवश्य समझना चाहिए की ये परम शांत तो हैं ही परन्तु तंत्र शास्त्रों में इनके नील सरस्वती और अनिरुद्ध सरस्वती का स्वरुप भी प्राप्त होता है जो की अत्यंत दारुण है अतः माता शारदा का तामसिक तथा तांत्रिक पूजन करने की भूल न करें क्यूंकि उग्र रूप प्रकट होने के बाद यदि उसकी विधि में कोई त्रुटि रह गई तो परिणाम अनर्थकारी हो सकते हैं अतः इनकी साधना सात्विक रूप से ही करनी चाहिए इनकी उपासना से मनुष्य समस्त सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाता है ज्ञान - विज्ञान प्राप्त कर देह लीला समाप्त होने के पश्चात मुक्ति का अधिकारी होता है ।

12th
मंगलवार

Rath Arogya saptmi

13th
बुधवार

Bhishmasthmi

16th
शनिवार

Bhishm dwadashi (til dwadashi)

19th
मंगलवार

Magh purnima

19th
मंगलवार

Magh snann

19th
मंगलवार

shri ravidash jayanti

मार्च - 2019
7 आयोजन
वर्ष :
4th
सोमवार

mahashivratri

14th
गुरुवार

Holashtak prarambh

14th
गुरुवार

Annpurna ashtmi

18th
सोमवार

Govind dwadashi

18th
सोमवार

Holika dehan

21st
गुरुवार

Holashtak samapt

28th
गुरुवार

shitlashtmi

अप्रैल - 2019
18 आयोजन
वर्ष :
2nd
मंगलवार

Varuni parv

3rd
बुधवार

Pihowatirth-hari

5th
शुक्रवार

Vikram samvat 2075 purn

6th
शनिवार

Vikram samvat prarambh

6th
शनिवार

Chetr navratri prarambh

8th
सोमवार

Gouri tritiya

10th
बुधवार

Lakshmi panchmi

11th
गुरुवार

Skand shasthi vrat

13th
शनिवार

Ashokasaptmi

13th
शनिवार

durgashthmi

13th
शनिवार

Ram navmi

14th
रविवार

Vasant navratri samapt

16th
मंगलवार

Shri lakshmikant dolotshav

17th
बुधवार

Vishnu damnotsav

17th
बुधवार

Anang tryodashi

18th
गुरुवार

Shiv damnotsav

19th
शुक्रवार

Veshakh snann prarambh

19th
शुक्रवार

Good friday

मई - 2019
11 आयोजन
वर्ष :
7th
मंगलवार

Bhagwan prashuram jayanti

7th
मंगलवार

Akshy tritiya

9th
गुरुवार

Sankracharya jayanti

11th
शनिवार

Shri ganga jayanti

12th
रविवार

Shri bagulamukhi jayanti

13th
सोमवार

Shri janki jayanti

17th
शुक्रवार

Shri nrisinh jayanti

18th
शनिवार

Shri kurm jayanti

18th
शनिवार

Buddh purnima

18th
शनिवार

Veshakh snann samapt

30th
गुरुवार

Apra bhadrkali ekadashi

जून - 2019
13 आयोजन
वर्ष :
3rd
रविवार

Vat savitri vrat

3rd
रविवार

Somvati amavasya

3rd
रविवार

Shaneshchar jayanti

5th
मंगलवार

Rambha tritiya vrat

8th
शुक्रवार

Aranya shasthi

8th
शुक्रवार

Vindhyavasni pujan

10th
रविवार

Shiri durgashtmi

10th
रविवार

Dhumavati jayanti

12th
मंगलवार

Shri ganga dasharha

13th
बुधवार

Nirjala ekadashi vrat

16th
शनिवार

Vatsavitri vrat (purnima paksh)

17th
रविवार

Sant kabir jayanti

21st
गुरुवार

Sayan dakshinayan prarambh

जुलाई - 2019
11 आयोजन
वर्ष :
4th
गुरुवार

Shri jagarnnath rath yatra

7th
रविवार

Shri kumar shasthi

8th
सोमवार

Vivasvat saptmi

12th
शुक्रवार

Hari shayni ekadashi

12th
शुक्रवार

Chaturyamaas vrat prarambh

12th
शुक्रवार

Shri vishnusaynotsav

16th
मंगलवार

Kokila vrat

16th
मंगलवार

Shiv shaynotsav

16th
मंगलवार

Khandgrash chandgrehan

16th
मंगलवार

Guru purnima (vyas pujan)

30th
मंगलवार

Shravan shivratri vrat

अगस्त - 2019
18 आयोजन
वर्ष :
1st
गुरुवार

Haryali amavasya

3rd
शनिवार

Haryali tij

5th
सोमवार

Nag panchmi

8th
गुरुवार

Durgashtmi

14th
बुधवार

Rigvedi upkarm

15th
गुरुवार

Raksha bandhan

15th
गुरुवार

Bharat swatantrta divash

15th
गुरुवार

Shravan purnima

18th
रविवार

Kajjali tritiya

19th
सोमवार

Shri ganesh (bahula)chatuthi

21st
बुधवार

Chandan shasthi vrat

23rd
शुक्रवार

Shri krishn janmashtmai (smart)

23rd
शुक्रवार

Durvashtmi

24th
शनिवार

Shri krishan jamashtmi(veshnav)

25th
रविवार

Shri gugga navmi

25th
रविवार

Gokulashtmi nandotsav

30th
शुक्रवार

Kushagrehni amavasya

30th
शुक्रवार

Pithori amavasya

सितम्बर - 2019
21 आयोजन
वर्ष :
1st
रविवार

Haritalika tritiya

1st
रविवार

Sama-upkarm

2nd
सोमवार

Siddhi-vanayak vrat

2nd
सोमवार

Kalank chaturthi

3rd
मंगलवार

Rishi panchmi vrat

4th
बुधवार

Surya shasthi vrat

5th
गुरुवार

Santan saptmi vrat

6th
शुक्रवार

Shri radhashtmi

6th
शुक्रवार

Shri mahalakshmi vrat

7th
शनिवार

Shri chandr navmi

10th
मंगलवार

Vaman jayanti

10th
मंगलवार

Shravan dwadashi

12th
गुरुवार

Anant chaturdashi vrat

13th
शुक्रवार

Proshtpadi ,purnima shraddh

14th
शनिवार

Pitri paksh prarambh

21st
शनिवार

Shri mahalakshmi vrat samapt

22nd
रविवार

Jivitputrika vrat

28th
शनिवार

Sarv pitri shraddh

28th
शनिवार

Mahalay shraddh samapt

28th
शनिवार

Gajachaya yog

29th
रविवार

Sharadh navratri prarambh

अक्टूबर - 2019
28 आयोजन
वर्ष :
2nd
बुधवार

Mahatmagandhi jayanti

2nd
बुधवार

Upang lalita vrat

4th
शुक्रवार

Saraswati awahan

5th
शनिवार

Saraswati pujan

6th
रविवार

Durgashtmi

6th
रविवार

Sarswati balidan

7th
सोमवार

Sarswati visharjan

7th
सोमवार

Mahanavmi (balidan divash)

7th
सोमवार

Navratri samapt

8th
मंगलवार

Vijaydashmi (dasahara)

9th
बुधवार

Bharat milap

9th
बुधवार

Kojagar vrat

13th
रविवार

Sharad purnima vrat

13th
रविवार

Maharshi valmiki jayanti

13th
रविवार

Kartik snann prarambh

17th
गुरुवार

Karva choth vrat

21st
सोमवार

Ahoiashtmi vrat

25th
शुक्रवार

Govats dwadshi

25th
शुक्रवार

Dhan tryodashi

26th
शनिवार

Hanuman jayanti

27th
रविवार

Narak chaturdashi

27th
रविवार

Dipawali

27th
रविवार

Shri mahalakshmi pujan

28th
सोमवार

Somvati amavasya

28th
सोमवार

Vishvkarma divash

28th
सोमवार

Annkut-Govardhan pujan

29th
मंगलवार

Yam dwitiya

29th
मंगलवार

Shri vishvkarma pujan

नवम्बर - 2019
15 आयोजन
वर्ष :
2nd
शनिवार

Surya shasthi parv

4th
सोमवार

Gopashtmi

5th
मंगलवार

Akshay navmi

8th
शुक्रवार

Hariprabodhni ekadashi

8th
शुक्रवार

Bhishm panchak

8th
शुक्रवार

Chaturmasya vratadi samapt

8th
शुक्रवार

Tulshi vivah

9th
शनिवार

Hariprabodhotsav

10th
रविवार

Vekunth chaturdashi

12th
मंगलवार

Tripurotsav

12th
मंगलवार

Kartik purnima

12th
मंगलवार

shri guru nanak jayanti

12th
मंगलवार

Kartik snann samapt

12th
मंगलवार

Bhishm panchak samapt

19th
मंगलवार

Shri kaalbheravashtmi

दिसम्बर - 2019
7 आयोजन
वर्ष :
2nd
सोमवार

Skand shasthi

3rd
मंगलवार

Vishnu saptmi

8th
रविवार

Shri geeta jayanti

8th
रविवार

Mokshda ekadashi

11th
बुधवार

Shri dattatry jayanti

25th
बुधवार

christmas day

26th
गुरुवार

Kankan dwadashi

उत्सव

That has been said enough that India celebrates every day. No wonder we do that, as we are a land of cultural diversity with a range of races and ethnicities dwelling here. Religion is no exception with India being home to umpteen religions. However, Hinduism dominates the list and has a widespread presence with a huge number of followers.

Hindus celebrate a lot of festivals in terms of the birth of Gods, death of Asuras, victory or marriage of gods, different phases of moons and more. Every occasion is graced with celebrations, dance and processions. However, there is a great religious reason behind it.

There are certain Hindu festivals that call for national holidays and are celebrated with great pomp and show. Furthermore, there are certain festivals, which mark the birth anniversaries or incarnation of gods and goddesses, and devotees observe day-long fast to seek their blessings. There are festivals like harvesting seasons, which have different times of celebrations in different parts of the country.

India is a land of gods, and everything from animals to trees is considered divine. There is a festival in the Hindu culture that is dedicated to snakes. This festival is known as Nag Panchami. On this day, people worship snakes and feed them with milk. Every events or festival is a reason for fun, music and dance. Though, this is only devotional in many cases and is followed by ritualistic feasts.

There are certain Hindu festivals, which have gained a global avatar and are celebrated all across the world. Diwali, Ganesh Chaturth and Durga Puja are to name few. Furthermore, there is an array of festivals, which are observed by a specific community of the people of a specific region. Onam, for example, is a festival which has great significance in Kerala whereas Skanda Sashthu is limited only to Tamil Nadu.

Furthermore, there are some festivals that have different significance and rituals in different parts of the country. For example, on Dewali, taking oil bath is a mandatory ceremony in Southern, while people in North India celebrate Diwali in altogether a different way by praying to Maa Lakshmi, lighting houses with candles and diyas, and bursting crackers.

Whatever is the mode of celebration, the reason behind it or the legend associated with it – festivals in India plays a significant role in our lives. They bring joy and happiness to the people, add colors, and bliss to the life of Indians.

Having said that, India and Hindu culture may seem a colourful and festival oriented too many, but this is of great importance to know that these festivals are not sprinkled around the dates just like that. There is a specific calendar available which mark these festivals according to the reasons associated with them.

Now, there may come a question that where can one find the complete Hindu calendar. At Astrospeak, we have provided you with the complete calendar with festivals and occasions associated with the dates. Click here to find the complete Hindu calendar

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