16 जुलाई 2020

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ज्योतिष क्या है?

द्वारा आचार्य पंकज जी

सामान्य परिचय-आकाश मे स्थित ज्योतिर्पिंडो के संचार और उनसे बनने वाले पारस्परिक सम्बन्धो के पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करने वाली विधा का नाम ज्योतिष हैं।
ज्योतिष शब्द ज्योति =तारा तथा ष=गणक या भाग्यवेता इन दो शब्दों से मिलकर बना हैं जिसका अर्थ हैं तारों अर्थात् आकाश में स्थित ज्योति पिंडो की स्थिति,उनकी दूरी तथा उनके परस्पर सम्बन्धादि की गणना के द्वारा भाग्य का शुभ-अशुभ फल बताने वाली विधा ही ज्योतिष हैं।
ज्योतिष शास्त्र को वेद का चक्षु कहा जाता हैं।जिस प्रकार नेत्रवान पुरुष नेत्रो से देखकर मार्ग की रुकावटों से बच सकता हैं उसी प्रकार ज्योतिष द्वारा भूत,वर्तमान एवम् भविष्य में सभी कष्टों से बचने के लिए उपाए किए जा सकते हैं –
“प्रयोजनं तु जगत: शुभाशुभनिरूपणम”

ज्योतिष के तीन प्रमुख भाग हैं जिन्हें त्रय स्कंध कहते हैं।
1-  सिद्धान्त 2-संहिता 3-होरा
सिद्धान्त गणित भाग को astronomy तथा संहिता एवं होरा को  astrology फलित् कहते हैं।
सिद्धान्त- गणित स्कंध में सृष्टि के आरम्भ से अब तक कितने वर्ष,मास,दिन,व्यतीत हो चुके हैं,ग्रहों की परस्पर दूरी तथा राशियों में उनके स्थानदि का  ज्ञान किया जाता हैं। गणित के आधार पर ही ग्रहों की स्थिति का ज्ञान होता हैं।नगर.देश.तथा
.विश्व मे घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाए  काल विशेष,वर्षा लक्षण,भूकम्प.बाढ़.सूनामी.अग्निभाय.हिंसा आदी का विचार सिद्धान्त पक्ष से किया जाता हैं।
फलित् के लिए गणित ही आधार हैं।होरा स्कंध एवं संहिता का दूसरा नाम ही फलित् ज्योतिष हैं।ग्रहों नक्षत्रों की स्थिति के द्वारा व्यक्ति विशेष के जीवन की शुभ-अशुभ घटनाओं की जानकारी फलित् ज्योतिष के माध्यम से मिलती हैं।
फलित् ज्योतिष में तिथि.वार.नक्षत्र.योग.करण.संक्रान्त.ग्रह.गोचर,के अन्तर्गत आते हैं।

ग्रह क्या हैं

भारतीय ज्योतिष में नव ग्रह का विचार किया जाता है।ये ग्रह सूर्य-चन्द्रमा-मंगल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि-राहु-केतु है।क्यूँकि इन में प्रथम सात के नाम सप्ताह पर आधारित है।जो प्रचलित है।प्रथम सप्त दृश्यमान आकाशीय पिण्ड है।
राहु केतु छाया ग्रह है।खगोल की दृष्टि से पृथ्वी ओर चन्द्र के अंडाकार भ्रमण पक्ष(orbit)जिन दो बिंदुओ पर एक दूसरे को काटते है,ये दोनो बिन्दु गतिशील है तथा वक्र (उलटी) गति से चलते है।भारतीय आचार्यों ने प्रज्ञाचक्षु से इनके प्रभावों को अनुभव कर इन्हें ग्रहों का स्थान दिया है।
कालान्तर में कुछ वर्षों पूर्व हुई खोज के अनुसार ज्योतिष में नवीन ग्रह यूरेनस,नेपच्यून,प्लूटो भी ग्रहो में शामिल कर लिए गए है।
यूरेनस की खोज 1789 में की गयी, नेपच्यून की खोज 1846 में की गयी,प्लूटो की खोज 1930 में की गयी।
खगोल की दृष्टि से सूर्य ग्रह(planet)नही है।वरन् स्वयं के प्रकाश से प्रकाशवान तारा (star)है ओर चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह है।
फलित में इनका पारस्परिक सम्बंध को समझने में सरलता हो इस लिए सभी को ग्रहो की संज्ञा दी गयी है।