01 अप्रैल 2020

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ज्योतिष

ज्योतिष - वैदिक ज्योतिष

सामान्य परिचय-आकाश मे स्थित ज्योतिर्पिंडो के संचार और उनसे बनने वाले पारस्परिक सम्बन्धो के पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करने वाली विधा का नाम ज्योतिष हैं।

ज्योतिष शब्द ज्योति =तारा तथा ष=गणक या भाग्यवेता इन दो शब्दों से मिलकर बना हैं जिसका अर्थ हैं तारों अर्थात् आकाश में स्थित ज्योति पिंडो की स्थिति,उनकी दूरी तथा उनके परस्पर सम्बन्धादि की गणना के द्वारा भाग्य का शुभ-अशुभ फल बताने वाली विधा ही ज्योतिष हैं।

ज्योतिष शास्त्र को वेद का चक्षु कहा जाता हैं।जिस प्रकार नेत्रवान पुरुष नेत्रो से देखकर मार्ग की रुकावटों से बच सकता हैं उसी प्रकार ज्योतिष द्वारा भूत,वर्तमान एवम् भविष्य में सभी कष्टों से बचने के लिए उपाए किए जा सकते हैं –

“प्रयोजनं तु जगत: शुभाशुभनिरूपणम”
ज्योतिष के तीन प्रमुख भाग हैं जिन्हें त्रय स्कंध कहते हैं।
1- सिद्धान्त 2-संहिता 3-होरा

सिद्धान्त गणित भाग को astronomy तथा संहिता एवं होरा को astrology फलित् कहते हैं।

सिद्धान्त- गणित स्कंध में सृष्टि के आरम्भ से अब तक कितने वर्ष,मास,दिन,व्यतीत हो चुके हैं,ग्रहों की परस्पर दूरी तथा राशियों में उनके स्थानदि का ज्ञान किया जाता हैं। गणित के आधार पर ही ग्रहों की स्थिति का ज्ञान होता हैं।नगर.देश.तथा
.विश्व मे घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाए काल विशेष,वर्षा लक्षण,भूकम्प.बाढ़.सूनामी.अग्निभाय.हिंसा आदी का विचार सिद्धान्त पक्ष से किया जाता हैं।
फलित् के लिए गणित ही आधार हैं।होरा स्कंध एवं संहिता का दूसरा नाम ही फलित् ज्योतिष हैं।ग्रहों नक्षत्रों की स्थिति के द्वारा व्यक्ति विशेष के जीवन की शुभ-अशुभ घटनाओं की जानकारी फलित् ज्योतिष के माध्यम से मिलती हैं।

फलित् ज्योतिष में तिथि.वार.नक्षत्र.योग.करण.संक्रान्त.ग्रह.गोचर,के अन्तर्गत आते हैं।

ज्योतिष 2019

ज्योतिष शास्त्र द्वारा भविष्य में होने वाली सभी शुभ-अशुभ घटनाओ का निर्धारण किया जाता है,इसकी गड़ना का मुख्या आधार तिथि-वार-नक्षत्र-योग-करण-राशि-ग्रह इत्यादि है,जीवन में उत्पन्न सभी घटनाओ का सही निर्धारण ग्रह गोचर द्वारा किया जाता है।

ग्रह गोचर का सही ज्ञान होने से भविष्य में होने वाली सभी घटनाओ का निर्धारण सरलता से किया जा सकता है,कुंडली पूछो द्वारा ज्योतिष 2019 में वर्तमान गोचर,ग्रह स्थिति,ग्रह अस्त-उदय,वक्री-मार्गी,राशि-नक्षत्र परिवर्तन द्वारा भविष्य का सही निर्धारण व सार्थक भविष्यवाणी की जाती है।

भारतीय ज्योतिष में नव ग्रह का विचार किया जाता है।ये ग्रह सूर्य-चन्द्रमा-मंगल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि-राहु-केतु है।क्यूँकि इन में प्रथम सात के नाम सप्ताह पर आधारित है।जो प्रचलित है।प्रथम सप्त दृश्यमान आकाशीय पिण्ड है।

राहु केतु छाया ग्रह है।खगोल की दृष्टि से पृथ्वी ओर चन्द्र के अंडाकार भ्रमण पक्ष(orbit)जिन दो बिंदुओ पर एक दूसरे को काटते है,ये दोनो बिन्दु गतिशील है तथा वक्र (उलटी) गति से चलते है।भारतीय आचार्यों ने प्रज्ञाचक्षु से इनके प्रभावों को अनुभव कर इन्हें ग्रहों का स्थान दिया है।
कालान्तर में कुछ वर्षों पूर्व हुई खोज के अनुसार ज्योतिष में नवीन ग्रह यूरेनस,नेपच्यून,प्लूटो भी ग्रहो में शामिल कर लिए गए है।
यूरेनस की खोज 1789 में की गयी, नेपच्यून की खोज 1846 में की गयी,प्लूटो की खोज 1930 में की गयी।

खगोल की दृष्टि से सूर्य ग्रह(planet)नही है।वरन् स्वयं के प्रकाश से प्रकाशवान तारा (star)है ओर चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह है।
फलित में इनका पारस्परिक सम्बंध को समझने में सरलता हो इस लिए सभी को ग्रहो की संज्ञा दी गयी है
ज्योतिष की मदद से, ज्योतिषी कुंडली / कुंडली का एक जन्मजात चार्ट बना सकते हैं, जो किसी व्यक्ति की विशेषताओं और व्यक्तित्व को समझने में मदद कर सकता है। इतना ही नहीं, एक कुंडली की मदद से हम उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं की पहचान कर सकते हैं जिनमें करियर, विवाह, प्रेम और रिश्ते, स्वास्थ्य, धन, वित्त और बहुत कुछ शामिल हैं।

12 राशियाँ आकाश मण्डल में स्थित है। राशि शब्द का अर्थ ढेर अथवा समूह है। चूँकि राशियाँ नक्षत्र समूह से बनी है इसलिए इन्हें राशि कहते है। अंग्रेज़ी में इन्हें साइन (sign) कहता है।साइन का अर्थ है निशान,चिन्ह।इनसे ग्रहो की स्थिति का पता चलता है।जो वस्तुएँ हम भूमंडल में देखते है उन्ही के अनुसार आकृति तारों से आकाश में बनी प्रतीत हुई,तो उसे वैसे ही नाम दे दिया गया।यह बात अनुभव में आयी है और यह अनुभव हज़ारों वर्ष का है कि राशि के नाम या आकृति के अनुसार उसके गुण भी होते है।

12 राशियो के पूरे रूप को राशि चक्र या भचक्र कहते है।पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ज़ोडीऐक (zodiac) कहा जाता है। नाड़ीवृत के 23.5-23.5 अंश दोनो ओर याने 47 अंश की एक पेटी( belt)है।इसी के अन्दर हमेशा सूर्य,चंद्र तथा अन्य ग्रह भ्रमण करते दिखाई देते है।इसी को राशि चक्र कहते है।इस राशि चक्र का आरम्भ मेष से होता है।

राशि चक्र
1-मेष 5-सिंह 9-धनु
2-वृष. 6-कन्या 10-मकर
3-मिथुन 7-तुला 11-कुम्भ
4-कर्क 8-वृश्चिक 12-मीन

नक्षत्र विचार
नक्षत्र क्या है

नक्षत्र तारा समूहों से बने है।इनसे हमारे सूर्य से कई गुना बड़े सूर्य तथा है।भारतीय ज्योतिष में नक्षत्रों की संख्या 27 मानी गयी है,कही अभिजित को लेकर 28 मानते है।27 और 28 दोनों का उपयोग प्राचीन काल से आज तक हो रहा है।नक्षत्रों के नाम इस प्रकार है-

1-अश्विनी 10-माघ 19-मूल
2-भरणी 11-पूर्वा-फाल्गुनी 20-पूर्वा-षाढा
3-कृतिका 12-उत्तरा-फाल्गुनी 21-उत्तरा-षाढा
4-रोहिणी 13-हस्त 22-श्रवण
5-मृगशिरा 14-चित्रा 23-धनिष्ठा
6-आर्द्रा. 15-स्वाति 24-शतभिषा
7-पुनर्वसु 16-विशाखा 25-पूर्वा-भाद्रपद
8-पुष्य 17-अनुराधा 26-उत्तरा-भाद्रपद
9-आश्लेषा 18-ज्येष्ठा. 27-रेवती

योगों के नाम

योग दो प्रकार के होते हैं विष्कुम्भादि तथा आनन्दादि योग इनमे से विष्कुम्भ आदि योग ही ज्यादा प्रमुख हैं ।

विष्कुम्भादि योगों के नाम

विष्कुंभक, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य,
शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति,
शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव
व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि,
व्यतिपात, वरीयान, परिघ, शिव,
सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल,
ब्रह्म, ऐन्द्र वैधृति

कारणों के नाम

करण दो प्रकार के होते है चर और स्थिर

चर करण 7 होते हैं – बव बालव कौलब तैतिल गर वणिज विष्टि ( विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं )

स्थिर करण – किंस्तुघ्न नाग शकुनि और चतुष्पद

कुंडली पूछो में हम आपको विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषियों के संपर्क में आने का मौका देते हैं, जो आपके भविष्य की भविष्यवाणी कर सकते हैं और आपको ऐसे उपाय और ज्योतिषीय सुझाव देते हैं जो आपको जीवन को आसान और बेहतर बना सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए, हमारी साइट में देखे।

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